मेट्रो से ट्रेवल करना अपने आप में ही एक अनोखा एक्सपीरियंस है। सेंट्रल एसी, शहर का खूबसूरत नज़ारा और किसी सुरंग के अंदर मेट्रो के जाने का ख्याल ही एक्साइटिंग एक्सपीरियंस देता है, और अब भारत, मेट्रो के एक्सपीरियंस को एक स्टेप ऊपर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। दरअसल, भारत को जल्द ही देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो की सौगात मिलने वाली है। इस मेट्रो सेवा की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये मेट्रो अंडरवाटर यानि पानी के नीचे बनी सुरंग में चलेगी।
देश में सबसे पहले मेट्रो सेवा शुरू कर इतिहास रचने वाला कोलकाता अब फिर एक नया इतिहास रचने वाला है। कोलकाता में भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो टनल (India’s First Underwater Metro Tunnel) का निर्माण होने जा रहा है। इस अंडरवाटर मेट्रो टनल का निर्माण हावड़ा (Howrah) और कोलकाता (Kolkata) के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए किया जा रहा है, जो की खूबसूरत हुगली (Hooghly) नदी के नीचे से गुजरेगी, जिस पर हावड़ा ब्रिज बनाया गया है।
आमतौर पर हावड़ा ब्रिज को फेरी से पार करने में लगभग 20 मिनट लगते हैं और सड़क मार्ग से यात्रा करने में 30 से 45 मिनट तक का समय लगता है, लेकिन ये अंडरवाटर मेट्रो टनल बनने के बाद यात्रा के समय को बहुत कम कर सकती है। इस कोलकाता ईस्ट-वेस्ट मेट्रो लाइन का निर्माण कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (KMRCL) द्वारा किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट 16.6 किमी लंबा और 520 मीटर रिवर बेड के नीचे होगा। टनल कॉरिडोर नदी के तल से 33 मीटर नीचे बनाया गया है। इस मेट्रो टनल की लंबाई 10.8 किमी और चौड़ाई 5.5 मीटर है। वहीं, सुरंग की छत ग्राउंड लेवल से करीब 30 मीटर की होगी।
इस टनल में यात्रियों के लिए कई तरह के सुरक्षा उपाय भी किए जाएंगे। किसी इमरजेंसी की स्थिति या पानी के अंदर कोई टेक्निकल प्रॉब्लम आने पर यात्रियों को निकालने के लिए टनल में पैदल चलने के लिए रास्ते भी बनाए जाएंगे। गौरतलब है कि कोलकाता मेट्रो का ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर 15 किलोमीटर लंबा है और साल्ट लेक स्टेडियम से हावड़ा तक फैला है। साल्ट लेक सेक्टर -5 से साल्ट लेक स्टेडियम के बीच इस मेट्रो लाइन में करुणामयी, सेंट्रल पार्क, सिटी सेंटर और बंगाल केमिकल मेट्रो स्टेशन हैं। इस प्रोजेक्ट को अमल में लाने के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से 41.6 अरब रुपये का लोन लिया गया है, जबकि भारतीय रेलवे बोर्ड भी इस प्रोजेक्ट के पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
ऐसा भारत में पहली बार हो रहा है की किसी नदी के अंदर एक ट्रांसपोर्ट टनल का निर्माण किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का फर्स्ट फेज 13 फरवरी 2020 को पूरा हो गया था। इस हावड़ा मेट्रो स्टेशन का लगभग 80% काम पूरा हो चुका है, जबकि 20% काम अभी बाकी है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि ये मेट्रो सेवा 2023 तक काम करना शुरू कर देगा।
