Dolphins

एक समय पर बिहार की गंगा में लोगों को डॉल्फिंस गोते लगते दिखती थी। लेकिन आज यहीं डॉल्फिंस दुर्लभ होती जा रही हैं। और यहीं दुर्लभ होती जा रही डॉल्फिन के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए केंद्र की तरफ से एक बड़ी पहल की गयी है। केंद्र के फैसले के मुताबिक अब से पूरे देशभर में बिहार की तर्ज पर डॉल्फिन डे मनाया जाएगा।

इसके लिए केंद्र सरकार ने 5 अक्टूबर को ‘डॉल्फिन डे’ मनाने का फैसला लिया है। बिहार में इस दिन हर साल डॉल्फिन दिवस मनाया जाता है। बताया जा रहा है कि पहले केंद्र सरकार ने डॉल्फिन डे मनाने के लिए 10 अक्टूबर को तारीख प्रस्तावित की थी और फिर सभी राज्यों से सुझाव मांगे गए थे। लेकिन बिहार में पहले से ही 5 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाता रहा है, इसलिए केंद्र ने भी इसी दिनपर अपनी मुहर लगाई है।

जिसके बाद से अब पूरे देशभर में ‘5 अक्टूबर’ को ही ‘डॉल्फिन डे’ मनाया जाएगा। आपको बता दें कि पिछले दिनों स्टैंडिंग कमेटी ऑफ नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की 67वीं बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके बाद सभी राज्यों को इस बारे में सूचना भी भेज दी गई।

मालूम हो कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल से ही 5 अक्टूबर 2009 को केंद्र सरकार ने डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई गंगा नदी घाटी प्राधिकरण की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश ने यह सुझाव दिया था। जिसके बाद से ही साल 2010 में इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया था। बिहार में इसी दिन को आधार मानकर 2012 से हर 5 अक्टूबर को डॉल्फिन डे मनाया जा रहा है।

इतना ही नहीं पीएम मोदी ने भी साल 2020 में 15 अगस्त को दिल्ली के लाल किले से देश को संबोधित करते हुए ‘प्रोजेक्ट डॉल्फिन’ की घोषणा की थी। इसके लिए विलुप्त होती जा रही डॉल्फिन को संरक्षित करने के लिए 10 करोड़ की राशि का प्रावधान भी जारी किया गया था। इसके लिए केंद्र की ओर से संचालन समिति का गठन किया गया और बिहार के आरके सिन्हा इसके सदस्य बने थे।

आपको बता दें कि दिल्ली में आखिरी बार 1967 में डॉल्फिन नजर आई थी। और वर्तमान में देश में लगभग 3200 डॉल्फिन हैं। इनमें से आधी डॉल्फिन बिहार में हैं। सूबे में गंगा नदी में सर्वाधिक 800 डॉल्फिन हैं। वहीं, गंडक नदी में भी 300 से ज्यादा डॉल्फिन मौजूद है। डॉल्फिन गंगा और इसकी सहायक नदियों में पाई जाती हैं। मगर धीरे-धीरे यह जलीय जीव दुर्लभ होती जा रही है।

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