पत्नियां अपने पति के लंबी उम्र के लिए किसी भी दर पर झुक सकती हैं। उनके पति स्वस्थ रहे खुश रहे इसके लिए वो हर दिन भगवन के चरणों में झुकती हैं। सुहाग की लंबी आयु व संतान सुख की प्राप्ति के लिए आज यानी सोमवार को सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा अर्चना कर रही हैं। वट वृक्ष को जल, दूध, फल, फूल व पूजन सामग्री अर्पित कर पंखा झेल रही हैं। साथ ही वृक्ष की परिक्रमा कर रक्षा सूत्र धागा वृक्ष में बांधा रही हैं।
वर्त की हुई महिलाएं आज वृक्ष के नीचे बैठ सावित्री और सत्यवान की कथा भी सुनेगी, फिर चना, शक्कर, पकवान, मिष्ठान प्रसाद के रूप में वितरण करेंगी। आज सुबह करीब 6 बजे से ही वट वृक्ष के नीचे सुहागिनों की भीड़ लगने लगी। जो शाम तक चलता रहेगा। इस बार वट सावित्री पूजा पर विशेष संयोग बन रहा है। सोमवती अमावस्या के साथ-साथ महिलाएं वट सावित्री की पूजा कर रही हैं।
इस दौरान महिलाएं पीपल और वट वृक्ष जहां पर एक साथ होता है, वहां पर वो ज्यादा जाटी हैं। वहीं वट वृक्ष के नीचे सावित्री व सत्यवान की कथा व्रतियों द्वारा सुनी जाती है। तब महिलाएं सोलह शृंगार किए पूजन करती है। ऐसी मान्यता है कि, इस पेड़ में बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ लटकी हुई होती हैं जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना जाता है। वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु एवं डालियों में शिव का निवास होता है। इसलिए इस वृक्ष की पूजा से सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
अपनी विशेषताओं और लंबे जीवन के कारण इस वृक्ष को अनश्वर माना गया है। वट वृक्ष की छांव में ही देवी सावित्री ने अपने पति को पुनः जीवित किया था। इसी मान्यता के आधार पर स्त्रियां अचल सुहाग की प्राप्ति के लिए इस दिन वरगद के वृक्षों की पूजा करती हैं। वट वृक्ष की पूजा करने से लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का फल प्राप्त होता है। यह व्रत स्त्रियों के लिए सौभाग्यवर्धक, पापहारक, दुःखप्रणाशक और धन-धान्य प्रदान करने वाला होता है। अग्नि पुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है इसलिए संतान प्राप्ति के लिए इच्छुक महिलाएं भी इस व्रत को करती हैं।
